Wednesday, May 18, 2022

जब राजीव गांधी नाले में फेंक आये थे गाड़ियों की चाबियाँ, घबरा गये थे सुरक्षा कर्मी

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आज 20 अगस्त को देश पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की 77वीं जयंती है. शायद आपको पता न हो लेकिन राजीव गाँधी अपनी मर्जी से प्रधानमंत्री नही बने थे. दरअसल लंदन में पढ़े राजीव गांधी की राजनीति में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी. लेकिन छोटे भाई संजय गांधी और माँ इंदिरा गांधी की मौत के बाद उन्हें बेमन से भारत की राजनीति का हिस्सा बनना पड़ा. आज उनकी जयंती के मौके जानते है उनकी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से.

राजीव गांधी खुद ही चलाते थे अपनी जीप

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी की सुरक्षा बढ़ा दी गयी थी. लेकिन उन्हें ये बिल्कुल भी पसंद नहीं था. इसलिए वो अपने गार्ड्स को ग्च्चा देकर अकेले ही निकल जाया करते थे. वो जीप चलाने के बड़े शौक़ीन थे. इसलिए वो अपनी जीप खुद ही चलाया करते थे.

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अक्सर वो अपनी सुरक्षा में लगी फोर्स को कम कराने की बात कहते नजर आये है. 1985 में जब वो तत्कालीन वायुसेना लक्ष्मण माधव कटारे की मृत्यु पर उनके घर गये थे. तब वहां से लौटते समय उनकी सुरक्षा में कई सारी गाड़ियाँ नजर आई. उन्होंने एक पुलिस अधिकारी से कहा कि वो ये सुनिश्चित करें की ये कारे उनके पीछे न आये.

नाले में फेंक दी थी चाबियाँ

जब राजीव गांधी जीप में सोनिया गाँधी को बैठाकर चलने लगे. तब उनकी सुरक्षा में लगी कारे भी उनके पीछे चलने लगी. उस समय तेज बारिश भी हो रही थी. राजीव गांधी ने अचानक से अपनी जीप रोकी और एक-एक करके उनकी सुरक्षा में लगी कारों की चाबियाँ निकालकर नाली में फेंक आये.

जब तक किसी को कुछ समझ में आता तब तक गांधी अपनी जीप स्टार्ट करके वहां से निकल गये. उनके ऐसा करने से एसपीजी सुरक्षा कर्मी बुरी तरह से डर गये. करीब 15 मिनट बाद जब उन्हें पता चला की गांधी 7 रेस कोर्स रोड पहुंच गये है. तब जाकर कही उनकी जान में जान आई. क्योंकि उस समय राजीव गांधी के दुश्मनों की संख्या बहुत बढ़ गयी थी.

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