Wednesday, May 18, 2022

काशी के घाटों पर गैर हिंदुओं की एंट्री बैन, वीएचपी और बजरंग दल ने दी चेतावनी

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गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करता अपना बनारस इन दिनों हिंदू और गैर हिंदुओं के बीच फंस गया है। हिंदुत्व को मानने वालों का कहना है कि काशी के घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। इसके लिए चेतावनी भरे जगह-जगह पोस्टर भी लगाए गए हैं।

गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित, लगे पोस्टर

एक बार फिर भोलेनाथ की नगरी काशी में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस प्रशासन को ताख पर रखते हुए सामाजिक एकता को चुनौती दी है। बनारस के पंचगंगा घाट, रामघाट, मणिकर्णिका घाट, दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने हेतु पोस्टर चस्पा किए गए हैं। इन पोस्टरों में अन्य समुदाय के लोगों के काशी घाट पर आने के लिए प्रतिबंध की बात कही गई है।

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वीएचपी और बजरंग दल ने दी चेतावनी

यदि आप इन पोस्टर्स पर नज़र मारें तो इनमें लिखा है कि “प्रवेश प्रतिबंधित-गैर हिंदू”। मां गंगा काशी के घाट और मंदिर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रतीक हैं। जिनकी आस्था सनातन धर्म में है उनका स्वागत है। अन्यथा ये क्षेत्र पिकनिक  स्पॉट नहीं है। फिर मोटे अक्षरों में लिखा गया है कि – “यह निवेदन नहीं चेतावनी है”।  अंत में- विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल, काशी।

गैर सनातनी धार्मिक स्थलों से दूर रहें

विश्व हिंदू परिषद के काशी महानगर के मंत्री राजन गुप्ता ने इन पोस्टर को लेकर कहा है कि गैर-सनातन धर्म के लिए चस्पा किया जा रहा पोस्टर केवल पोस्टर नहीं, बल्कि एक चेतावनी वाला संदेश है। गंगा घाट मंदिर और धार्मिक स्थल सनातन धर्म की आस्था का प्रतीक है, हम चेतावनी देना चाहते हैं कि गैर सनातनी हमारे सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों से दूर रहें, क्योंकि यह कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। जिन लोगों की आस्था सनातन धर्म में उनका तो हम स्वागत करेंगे, नहीं तो हम उनको खदेड़ने का भी काम करेंगे।

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घाट कोई पिकनिक स्पॉट नहीं हैं

वहीं, बजरंग दल काशी महानगर के संयोजक निखिल त्रिपाठी ने इस पूरे मामले पर रौशनी डालते हुए कहा कि यह पोस्टर नहीं बल्कि उन लोगों के लिए चेतावनी है जो हमारी अविरल मां गंगा को एक पिकनिक स्पॉट की तरह मानते हैं। पोस्टर के माध्यम से यह चेतावनी दी गई है कि ऐसे लोग हमारे धार्मिक स्थलों से दूर रहें नहीं तो बजरंग दल उन्हें दूर कर देगा।

सपा ने लगाया ध्रुवीकरण का आरोप

उधर, समाजवादी पार्टी ने बनारस के घाटों और मंदिरों पर लगाए गए इन पोस्टरों पर नाराज़गी जताई है। सपा ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण करार दिया है साथ ही इसे चुनावी स्टंट बताया है।

समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष किशन दीक्षित ने इन पोस्टरों को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि वाराणसी में वैसे भी सभी धर्मों के लोग सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं। सामान्य तौर पर न कोई मुसलमान मंदिर में जाता है और न कोई हिंदू मस्जिद में पहुंचता है। फिर इस तरह के बैनर लगाने का क्या मतलब है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए अब धार्मिक ध्रुवीकरण कर समाज का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।

पहले भी हिंदूवादी संगठन कर चुके हैं ऐसा कृत्य

गौरतलब है, यह कोई पहला मौका नहीं है जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदुत्ववादी संगठनों ने काशी में सामाजिक समरसता को चुनौती दी हो। इससे पहले 25 दिसंबर को काशी में एक चर्च के बाहर वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा पढ़ने का काम किया था। इसके बाद कई मॉल और रेस्टोरेंट्स पर न्यू ईयर पार्टी के सेलिब्रेशन को लेकर पोस्टर लगाए गए थे जिनमें पार्टी ना करने के लिए कहा गया था।

पोस्टर लगाने वालों की हो रही पहचान

वहीं, इस पूरे प्रकरण पर अपर पुलिस उपायुक्त काशी जोन राजेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में लगी है। पोस्टर चिपकाने वालों और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों की पहचान की जा रही है। वह चाहे किसी भी दल से जुड़े हों उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

 

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