Friday, August 19, 2022

तो भारतीय ग्रंथो में पहले से वर्णित थी डार्विन थ्योरी (जीवन उत्पत्ति का सिद्धांत )??

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●First Evolution Theory Of The World●
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जीवन की उत्पत्ति की खोज….हमेशा से मानवो के अनुसंधानों की सूची में प्रथम स्थान पर रही है…
जीवो की उत्पत्ति के सन्दर्भ में विश्व में सर्वमान्य सिद्धांत डार्विन के द्वारा दिए गए “Evolution” थ्योरी की कुछ ख़ास बाते आज मैं आपको बताता हूँ
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1: डार्विन वाद के अनुसार… दुनिया के सभी जीवो की उत्पत्ति का क्रम… “सरल से जटिल” की ओर रहा है
अर्थात… पृथ्वी पर पहले वनस्पति आदि पैदा हुई… फिर एक कोशीय समुद्री जीव.. फिर बहुकोशिय जीव… जमीन पर चलने वाले जीव
विकास की इस चैन में.. समय के साथ… मौसम के बदलाव आदि से “डीएनए” में म्युटेशन के द्वारा… जीवो में बदलाव आते गए
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2: शुरूआती जीव यानी सिंगल सेल ऑर्गेनिस्म “Asexual Reproduction” के जरिये संताने उत्पन्न करते थे… इस प्रक्रिया को “Binary Fission” कहते है… Sex Came Later !!!
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3: दुनिया के सभी जीवो का मुख्य उद्देश्य “Reproduction” अर्थात अपने जैसी संताने पैदा करना और अपने वंश को आगे बढ़ाना है
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4: दुनिया के सभी जीवो का एक अन्य मुख्य उद्देश्य स्वयं को वातावरण और परिस्थितियो के अनुकूल बनाते हुए… स्वयं का विकास करना है
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एवोल्यूशन थ्योरी में… कुछ गैप्स हो सकते हैं.. Evidences Are Coming Up… लेकिन एवोल्यूशन के मूल सिद्धांत यानी “सरल से जटिल” जीवो का विकास यानी… “एक सिस्टेमेटिक प्रोसेस विकास” पे विश्व के किसी वैज्ञानिक को कोई शक नहीं है
एवोल्यूशन दुनिया का आज सर्वमान्य सिद्धांत है
विजय सिंह ठकुराय  जीवन उत्पत्ति का सिध्धांत  theory of evolution

अब आइये… आपको भारतीय ग्रंथो में वर्णित… जीवो की उत्पत्ति सर्ग का एक ऐसा महत्वपूर्ण अनकहा अंश सुनाता हूँ… जो एवोल्यूशन के सम्बन्ध में आपके सब पूर्वाग्रहों को दूर कर देगा
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विष्णु पुराण अध्याय 5
“सृष्टि उत्पत्ति सर्ग”
1. पृथ्वी पर सर्वप्रथम वनस्पति, पर्वतो आदि की उत्पत्ति हुई… इस काल को मुख्य सर्ग कहा जाता है
तत्पश्चात… कीट पतंगों, जानवरो आदि की सृष्टि हुई.. इस काल को “तिर्यक सर्ग” कहा जाता है
तत्पश्चात मनुष्यो की उत्पत्ति हुई… जिसे मनुष्य सर्ग कहा गया
Sounds Like Evolution? Right !!!
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2. पहले अमैथुनी सृष्टि (Asexual Reproduction) का विकास हुआ… उसके बाद मैथुनी सृष्टि
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3: सभी जीवो का मुख्य उद्देश्य संतानोत्पत्ति है.. जो अपने वीर्य का संचय कर संतान उत्पन्न नहीं करता है… उसके पितरो का कभी उद्धार नहीं होता है… अधिक जानने के लिए महाभारत में वर्णित “जरत्कारु ऋषि” की कथा पढ़े
भारतीय संस्कृति में एवोल्यूशन के आधार स्तम्भ Reproduction यानी संतानोत्पत्ति को सबसे ज्यादा महत्त्व दिए जाने के कारण ही… ब्रह्मा पुत्र “सनत कुमारो” और दुर्वासा ऋषि के अतिरिक्त…किसी भी ऐसे ऋषि का वर्णन नगण्य ही है… जिसने विवाह ना किया हो
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4: आत्मा का मुख्य उद्देश्य चेतना तथा ज्ञान के उच्चतम स्तर को प्राप्त करना है
(श्री कृष्ण उवाच वाया भगवद्गीता)
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चाहे वेद हो अथवा पुराण…
चाहे उपनिषद हो… अथवा न्याय,मीमांसा या सांख्य दर्शन
हर भारतीय दर्शन में… सृष्टि उत्पत्ति वर्णन की ख़ास बात ये है कि
ये वर्णन.. “एक प्रोसेस” फॉलो कर प्रकृति के रहस्यों को समझाने की कोशिश करते हैं
विज्ञान भी और है ही क्या?
प्रोसेस… पैटर्न्स के विवेचन और अनुसन्धान का नाम ही तो विज्ञान है
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So It Turns Out…
जीवो की उत्पत्ति का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत… विकासवाद यानी एवोल्यूशन… भारतीय परम्परा की देन है.. जिसपे हमें गर्व होना चाहिए
And I Always Thought.. You Hate Evolution?
May Be.. Because You Never Tried To Understand It…
Go Now & Start Study Now!!!!

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-विजय सिंह ठकुराय झकझकिया

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