Thursday, July 7, 2022

पापा के साथ सब्जी बेचने वाली अंकिता मेहनत के दम पर बनी सिविल जज, संघर्ष से भरी है सफलता की कहानी

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मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाली अंकिता नागर ने प्रदेश के सिविल जज परीक्षा में पाँचवा स्थान हासिल कर पिता को गौरान्वित किया है। बहुत कम ही ऐसे लोग होते हैं तो चुनौतियों से लड़ने का निर्णय लेते हैं और उन पर विजय प्राप्त करते हैं। अंकिता उन्हीं में से एक हैं। दिन में 10 से 12 घंटे पढ़ाई करने के अलावा घर के कामों में हाथ बंटाते हुए अंकिता ने सफलता की कहानी लिखी है।

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ठेले में सब्जी बेचते हैं पिता

अंकिता बहुत गरीब परिवार से आती हैं। सब्जी बेचकर ही उनके पिता अपने परिवार का पालन – पोषण करते हैं। अंकिता बचपन से ही अपने पिता और माता को मेहनत करती देखती आयी है। उसके अंदर जुनून था कि उसे ऊंचा उठना है और आसमां तक का सफर तय करना है। वह समय निकालकर अपने पापा की मदद करने भी जाया करती थी। जैसे ही उन्हें रिजल्ट मालूम हुआ वे आंखों में खुशी के आँसू लेकर मम्मी-पापा के पास पहुँची और उन्हें खुशखबरी सुनाई। अंकिता के परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

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बचपन से ही अंकिता पढ़ाई में तेज रही हैं

अंकिता अपने जूनियर क्लासेस से ही पढ़ाई में तेज रही हैं। वे स्कूल की टॉपर भी हुआ करती थी। वे पढ़ाई के अलावा खेलकूद में भी भाग लेती थी। उनके मुकाबले उनके दोनों भाई-बहन पढ़ाई में पीछे रहे। उन्होंने लॉ की पढ़ाई पूरी दृढ़ता से की। उनको विधि की जानकारी होने के साथ ही अन्य विषयों की भी जानकारी परिपूर्ण हैं।

अंकिता की सफलता के पीछे परिवार का हाथ

अंकिता नागर बताती हैं कि आज वो अपने परिवार के सहयोग के कारण ही सफल हो पाई है। उनकी छोटी बहन की शादी कर दी गई थी लेकिन अंकिता पढ़ाई करके किसी पोस्ट में जाना चाहती थी इसलिए उन्होंने स्टडी पर फोकस किया। अंकिता के भाई रेत मंडी में मजदूरी करते हैं। उनके भाई ने भी उनका भरपूर साथ दिया। जब पिता को सब्जी बेचने के लिए सहायता होती तो अंकिता की माँ चल पड़ती लेकिन अंकिता की पढ़ाई में रुकावट पैदा नही होने देती।

अपने परिवार की स्थिति को सुधारना चाहती हैं अंकिता

अपने मेहनत के दम पर आज अंकिता बेहद प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने जा रही हैं। वे समाज के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं और साथ ही अपने परिवार की स्थिति बदलना चाहती हैं। अब वो अपने पिता को सब्जी बेचने और भाई को मजदूरी करते हुए नही देखना चाहती। वह अब माता – पिता को सुख और शांति देना चाहती थी जिसके लिए उनके पालक इतनी मेहनत करते रहे। अंकिता जान चुकी थी जिनगी भर सब्जी बेचने से उनका परिवार आगे नही बढ़ पाएगा। उन्होंने संकल्प लिया और फल सबके सामने है।

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