Wednesday, May 18, 2022

पिता की मौत पर 7 वर्ष के बिरजू महाराज ने कत्थक को उत्कृष्ट सम्मान दिलाने की ले ली थी प्रतिज्ञा

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देश और दुनिया में कत्थक की प्राचनी कला को लोकप्रिय बनाने में अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाले पंडित बिरजू महाराज का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रविवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से उनके निज निवास पर महाराज का निधन हो गया।

पंडित बिरजू महाराज की मौत की खबर से पूरा देश स्तब्ध है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी तक सभी दिग्गजों ने महान कत्कथ नर्तक पंडित बिरजू महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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पीएम ने दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने पंडित जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, भारतीय नृत्य कला को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाने वाले पंडित बिरजू महाराज जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!

बता दें, बिरजू महाराज के देहावसान की खबर से पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। कला, संगीत और अदाकारी के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए तमाम अभिनेता-अभिनेत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

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कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला ‘पद्म विभूषण’ सम्मान

मालूम हो, दुनियाभर में भारत की संस्कृति और कला को पहचान दिलाने के लिए पंडित बिरजू महाराज ने अपना जीवन खपा दिया। कला एवं संस्कृति के प्रति उनके समर्पण ने कत्कथ को विशिष्ट स्थान प्राप्त कराया। बिरजू महाराज के इस योगदान के लिए 1986 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा गया।

लखनऊ घराने से था ताल्लुक

बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ के निवासी जगन्नाथ महाराज के घर हुआ था। इनके पिता जगन्नाथ रायगढ़ रजवाड़े में नर्तक थे जिन्हें लखनऊ में अच्छन महाराज के नाम से भी जाना जाता था। इनके दो छोटे भाई थे जिनको लच्छू महाराज औ शंभू महाराज के नाम से पहचाना जाता था। कहा जाता है कि बिरजू महाराज जब सात वर्ष के थे तब इनके पिता की अकस्मात मौत हो गई। इसके बाद बिरजू महाराज ने पिता की विरासत यानी कत्थक को उसकी पहचान दिलाने का बीड़ा उठाया। पिता के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से बिरजू महाराज ने अपने चाचा लच्छू महाराज और शंभू महाराज से शिक्षण प्राप्त किया।

धीरे-धीरे इस कला के ये मास्टर बन गए और महज़ 13 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के संगीत भारती में नृत्य की शिक्षा देना प्रारंभ कर दिया।

उसके उपरांत बिरजू महाराज ने दिल्ली में ही भारतीय कला केंद्र में नृत्य सिखाना आरम्भ किया। कुछ समय बाद ये कत्थक केन्द्र में भी शिक्षक के तौर पर कार्यरत रहे। यहां वे संकाय के अध्यक्ष तथा निदेशक थे।

कला की सेवा में दिन-रात मेहनत के बाद पंडित बिरजू महाराज ने 1998 में कत्थक केंद्र से निदेशक के तौर पर सेवानिवृत्ति पाई।

बॉलीवुड पर छोड़ी कत्थक की छाप

पंडित बिरजू महाराज ने कत्थक को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तमाम प्रयास किये जिनमें नाटक से लेकर अकादमी में शिक्षण तक सब शामिल हैं। हालांकि, इसमें सबसे बड़ा योगदान फिल्म इंडस्ट्री का रहा। बता दें, प्रसिद्ध नर्तक पंडित बिरजू महाराज को हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक और तालवादक के रुप में भी जाना जाता है। बॉलीवुड में महाराज के योगदान की चर्चा करें तो इन्होंने सत्यजीत राय की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में  संगीत की रचना की,  तथा उसके दो गानों पर नृत्य के लिये गायन भी किया। इसके अलावा साल  2002 की सुपरहिट फिल्म देवदास  में काहे छेड़ छेड़ मोहे का नृत्य संयोजन किया। महाराज ने इस सबके अलावा भी कई फिल्मों में कत्थक नृत्य का संयोजन किया जिनमें डेढ़ इश्किया, उमराव जान और बाजी रावमस्तानी जैसी फिल्में मुख्य रुप से शामिल हैं।

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