सैफ-करीना इस महाबली जोगराज सिंह गुर्जर की कहानी पढ़ लेते तो तैमूर नाम नही रखते !

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हत्यारे तैमुर की सेना कई गुणा ज्यादा थी लेकिन महाबली जोगराज को अपनी सेना पर पूरा भरोसा था

महाबली जोगराज सिंह गुर्जर ने अपनी सेना में जोश भरने के लिए उन्हें संबोधित किया-

हे वीरो !

ऋषि मुनि जिस स्थान पर जिन्दगी भर की तपस्या के बाद पहुच पाते है और उन्हें जो स्थान प्राप्त होता है वीर योध्दा उसे अपनी मात्रभूमि कि रक्षा करते हुए जान देने पर प्राप्त कर लेता है ! अपने देश को बचाओ और इसके लिए अगर बलिदान होना पड़े तो हो जाओ ! राष्ट्र तुम्हे याद रखेगा !! भगवान कृष्ण के गीता ज्ञान को याद करो और दुश्मन के विनाश के लिए आगे आओ “

इसके बाद महाबली जोगराज गुर्जर की सेना ने प्रण लिया कि चाहे हम जिन्दा रहे न रहे लेकिन इस अत्याचारी को यहाँ से भागकर छोड़ेंगे !!

सबसे पहला युद्ध मेरठ में हुआ जहाँ वीरो ने तेमूर की सेना को सांस नहीं लेने दिया , महिला सेनिको ने रामप्यारी गुर्जरी के नेतृत्व में उनके ठिकानों पर गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से रात को हमले बोले और उनके खाने की रसद और हथियारों को नष्ट करना शुरू कर दिया ! जिससे घबराकर तैमुर अपनी ढाई लाख की सेना के साथ हरिद्वार की तरफ बढ़ा |

हरिद्वार में तैमुर ने भयंकर तरीके से हमला किया जहाँ जोगराज गुर्जर की पंचायती सेना ने मुहतोड़ जवाब दिया ! महाबली जोगराज शेर की तरह तैमुर की सेना पर टूट पड़े और काटना शुरु कर दिया ! महाबली जोगराज गुर्जर जिस तरफ जाते लाशो का ढेर लगा देते ! महिला सेना की कमान रामप्यारी गुर्जरी ने संभाली हुई थी ! तैमुर ये देखकर हैरान था कि 20-२२ साल की इतनी सुंदर युवती युद्ध के मैदान में जब उतरती है तो साक्षात् रणचंडी सी दिखाई देती है ! कई दिनों तक भयंकर युद्ध चला जिसमे एक तरफ आततायी राक्षस रूप में देश की अस्मिता और पवित्रता पर हमला करके उसे खंड खंड करना चाहते थे और दूसरी तरफ देश के वीर मतवालों और नवयुवतियो की सेना थी जो हर हाल में अपनी जान देकर भी मात्रभूमि की रक्षा करना चाहती थी !

युद्ध में तैमुर की ढाई लाख की सेना में से एक लाख साठ हजार को महाबली जोगराज गुर्जर की सेना ने काट डाला ! युद्ध में जोगराज गुर्जर के उपसेनापति हरवीर सिंह गुलिया गंभीर रूप से घायल हो गये उनको निकालने के लिए महाबली जोगराज गुर्जर ने २२ हजार मल्ल योध्धाओ के साथ मिलकर तैमुर के 5000 घुड़सवारो को काट डाला और योध्दा को अपने घोड़े पर निकाल लाये , लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और हरवीर सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये ! महाबली जोगराज गुर्जर के कई सेनापति इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए !

अपनी सेना को इतनी भारी मात्रा में मारे जाते देख तैमूर को युद्ध छोड़कर भागना पड़ा और वीरो  ने अपनी जान देकर भी अपनी पवित्र भूमि को दुश्मनों से सुरक्षित कर लिया ! इस भीषण युद्ध में महाबली के लगभग 40 हजार योद्धा शहीद हुए ! इसी भीषण युद्ध में तैमुर भी भाले के वार से घायल हो गया था ! बताया जाता है कि इसी घाव की वजह से तैमूर  की मौत उसके देश में हुई थी !  महाबली जोगराज गंभीर रूप से घायल हुए और हरिद्वार के जंगलो में चले गये ! उनकी म्रत्यु के बारे में किसी को ठीक से जानकारी नहीं है लेकिन बताया जाता है कि हरिद्वार के जंगलो में ही इस योध्दा ने प्राण त्यागे ! महाबली जोगराज की रियासत को आज भी गुर्जर रियासत के नाम से जाना जाता है !

प्रख्यात कवि चंद्रभटट ने इस युद्ध का अपनी आँखों से देखा इतिहास लिखा था और इस बारे में हरियाणा के प्रसिद्ध इतिहासकार स्वामी ओमानंद जी ने भी महाबली जोगराज गुर्जर और रामप्यारी गुर्जरी  के बारे में काफी विस्तार से लिखा है ! खाप पंचायत के इतिहास के सदियों पुराने ऐतिहासिक रिकार्ड् में ये सब दर्ज है !

-S.K Nagar

(उपरोक्त कथा विभिन्न जनश्रुतियो ,खाप पंचायत के आलेखो , ब्लॉग ,  गुर्जर एवं जाट इतिहास की पुस्तकों , हरियाणा के प्रसिद्ध इतिहासकार स्वामी ओमानंद जी के आलेख , डॉ शुशील भाटी इतिहासकार जी के आलेखों एवं विकिपीडिया से जुटाई गयी सामग्री पर आधारित है ! )

Jograj singh Gurjar , Veeragna Rampyari Gurjari , Taimur , temur , Taimoor

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