Tagged: कृष्ण आनंद चौधरी

दर्द सहने का उद्योग,जो महिलाओं के इस भाव और पुरुषों के इस विचार की कमाई खाता है ! 

देखा है कि कुछ स्त्रियों को कि कैसे अच्छी लगती है उन्हें बेबसी ! लाचारी, गिड़गिड़ाना ? कहती हैं – “टाई मी अप” …मुझ पर हावी हो जाओ। दर्द सहने का अपना एक नशा...

कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत या मन से ठहाके लगाकर हंसती चरित्रहीन औरत ?

    हां मुझे भी चरित्रहीन औरतें पसंद हैं… बेहद… बेहद.. खूबसूरत होतीं है वो। बेबाक, बेपर्दा, स्वतंत्र और उनमुक्त… कि उनका कोई चरित्र नहीं होता। केवल चरित्रहीन औरतें ही खूबसूरत होती हैं। पिजरे...