sushobhit saktawat सुशोभित सक्तावत

फ़ेसबुक को सुशोभित सक्तावत से डर क्‍यों लगता है ?

साथियो, मेरा नाम सुशोभित सक्‍तावत है और मैं नफ़रत का सौदागर नहीं हूं ! मेरा केवल एक ही दोष है : बेईमानी के बियाबान में जितनी घास नहीं उगती, उससे ज़्यादह सवाल मेरे ज़ेहन में उगते हैं! लेकिन यही तो मुसीबत है कि सवालों के जवाब नहीं हैं, उल्टे सवाल पर सवाल हैं! “सवाल पर […]

सच यही है कि 2 अरब मुस्ल‍िमों ने आज वैश्व‍िक सभ्यता को “बंधक” बना रखा है।

सभ्यताओं का स्वरूप कभी स्थानीय हुआ करता था, फिर उनकी अंत:क्रियाएं हुईं, नए “कल्चरल पैटर्न्स” उभरे और यह कोई नई ख़बर नहीं है। अगर आज दुनिया का स्वरूप वैश्वीकृत है, अगर सूचना-तकनीक वैश्व‍िक है, अगर आर्थ‍िक तंत्र वैश्विक संवेदों के आधार पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं तो एक “वैश्व‍िक सभ्यता” की कल्पना क्यों नहीं […]

सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं,विषबेल यानि स्लीपर सेल से भी सावधान!

अंग्रेज़ी की एक कहावत है fore warned fore armed यानी अग्रिम चेतावनी मिलना सशस्त्र होना है। हमारे सैनिकों का पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में स्ट्राइक करना केवल प्रारम्भ है। इस ठुकाई से आतंकवादी विचारधारा की साख दांव पर है और वो इसे सरलता से नहीं डूबने देंगे। हमारे वार को अगर वो चुपचाप पचा […]