दिल्ली के गुर्जर नहीं देंगे जेएनयू के छात्रो को घर, नहीं चाहिए राष्ट्रविरोधी किरायेदार !

जेएनयू समर्थक मार्च निकालते हुए

पिछले साल जेएनयू में हुए देशद्रोही घटनाक्रम के बाद जेएनयू की साख पर ऐसा कलंक लग गया है कि यूनिवर्सिटी के छात्रो को किराए पर घर मिलने भी बंद होने लगे है |

अभी रामजस कॉलेज में हुए मारपीट काण्ड ने इस मामले को फिर से हवा दे दी है | इसी बीच एक और खबर आ रही है जो जेएनयू के छात्रो के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है | दरअसल दिल्ली यूनिवर्सिटी के आस पास के गाँव गुर्जर बहुल है और आर्थिक रूप से काफी संपन्न माने जाते है और इस एरिया में सर्वाधिक किराए के लिए उपलब्ध मकान इसी समुदाय के है | ज्यादातर दूर दराज से आने वाले छात्र इन्ही गुर्जरों के मकानों में किराए पर कमरे लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करते है | न सिर्फ जेएनयू बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के भी अधिकतर कॉलेज के आस पास इसी समुदाय के गाँव है जहाँ पर छात्रो को किराए पर कमरे दिए जाते है | अब इन गुर्जर मकान मालिको ने जेएनयू के छात्रो को अपने यहाँ किराए पर कमरा देने से मना करना शुरू कर दिया है |

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पिछले साल जेएनयू में हुए घटनाक्रम में गुर्जरों ने अपने घरो से जेएनयू के छात्रो को बाहर निकालना शुरू कर दिया था , उनका कहना था कि जो व्यक्ति देश के टुकड़े करने और बर्बादी के नारे लगायेगा उसे अपने यहाँ रखकर हम राष्ट्र का अपमान नहीं कर सकते |

पिछले साल दिल्ली के विभिन्न एरिया जैसे कालका गढ़ी , कोटला मुबारकपुर , पेलंजी , अलीगंज , तेखंड , जेतपुर , घिटोरनी , करावल नगर , सीलमपुर, खेरपुर , जूड्बाग आदि गुर्जर समुदाय के गाँवों ने अपने यहाँ किराए पर रह रहे जेएनयू के छात्रो को बाहर निकालना शुरू कर दिया था , अब फिर से वही माहोल बनना शुरू हो गया है ! जेएनयू के छात्रो को मकान किराए पर देने से समुदाय के लोगो ने मना कर दिया है !

ऐसा माहौल बनने के पीछे कहीं न कहीं जेएनयूं का वो माहोल है जो वहां बीफ फेस्टिवल करवाता है , जो वहां अफजल की फांसी का विरोध करता है और कन्हैया और उमर खालिद जैसे लोगो को आश्रय देता है !

गुर्जर jnu जेएनयू गुर्जर इतिहास

गुर्जर समाज के बुजुर्गो की एक पुरानी तस्वीर !

कोटला गाँव के सचिन पंवार ने बताया कि”पहले हम किसी भी छात्र को किराए पर कमरा दे देते थे लेकिन इस सब घटनाक्रम के बाद हमने तय किया है कि हम जेएनयू के छात्रो को किराए पर घर नहीं देंगे ! जो लोग राष्ट्र के सगे नहीं है और जिनकी पैरवी अलगाववादी करते है उन्हें घर देकर हम अपने उन पूर्वजो का अपमान नहीं कर सकते जिन्होंने राष्ट्र के लिए कुर्बानियां दी ”

विकास बिधूड़ी कहते है कि –

राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल छात्रो को घर देने का मतलब अपने उन गुर्जर पूर्वजो के बलिदान को भूलना है जिन्होंने इस राष्ट्र की अखंडता और आजादी के लिए बलिदान दिया ! अंग्रेजो ने दिल्ली के कई गुर्जरों के गाँवो को नष्ट कर दिया था और हजारो गुर्जर क्रांतिकारियों को सजा ए मौत दी थी , फत्तेपुर जैसे गाँवों के नौजवानों को एक साथ फांसी पर लटका दिया था , हमारा इतिहास शहादत का रहा है , ऐसे में इन लोगो को आश्रय देना अपने समाज की शहादत को भूलने के बराबर है

सीलमपुर गाँव के अमित डेढा ने बताया कि”दिल्ली विश्वविध्यालय के माहौल में जहर घोलने वाले छात्र और उनके अध्यापक राष्ट्रद्रोही की श्रेणी में आते है , जो राष्ट्र को बाटने की बाते करते है उनको किराए पर घर देना उनको बढ़ावा देना है | हमने निर्णय लिया है कि ऐसे छात्रो को हम अपने यहाँ किराए पर घर नहीं देंगे !”

रामजस कॉलेज की घटना के विरोध में abvp का मार्च

 

यही नहीं , इन लोगो ने मकान किराए दिलाने वाले डीलर और एजेंट से भी बोलना शुरू कर दिया है कि जेएनयू के छात्रो और अध्यापको को लेकर ना आये ! बहरहाल इन चंद देशद्रोही छात्रो और अध्यापको की वजह से काफी ऐसे छात्र भी मुश्किल में है जिन्हें इन सब गतिविधियों से कोई लेना देना नहीं है लेकिन इनकी वजह से पिस रहे है !  लेकिन अब इन राष्ट्रविरोधी ताकतों को समझ आ जाना चाहिए कि यदि उन्होंने अपनी हरकते बंद नहीं की तो जल्दी ही उन्हें अपना बोरिया बिस्तर समेटना होगा !

 

 

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