सम्राट मिहिर भोज गुर्जर , mihir bhoj gurjar

ये थे असली बाहुबली हिन्दू सम्राट मिहिर भोज, जिसके नाम से थर थर कापते थे अरबी और तुर्क !

आपने बाहुबली फिल्म तो देखी होगी,लेकिन क्या आपको अंदाजा है भारत में एक महान हिन्दू सम्राट हुए है जिन्होंने पूरी जिन्दगी अरब आक्रान्ताओं से टक्कर ली और हिन्दू धर्म की रक्षा की ! इनके शासनकाल में ही भारत को सोने की चिड़िया बोला जाता था | आइये आपको सम्राट मिहिर भोज गुर्जर के बारे में बताते है

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सम्राट मिहिर भोज गुर्जर  ने 836 ईस्वीं से 885 ईस्वीं तक 49 साल तक राज किया। मिहिर भोज गुर्जर के साम्राज्य का विस्तार आज के मुलतान से पश्चिम बंगाल में गुर्जरपुर तक और कश्मीर से कर्नाटक तक था। मिहिर भोज के साम्राज्य को तब गुर्जर देश के नाम से जाना जाता था। ये धर्म रक्षक सम्राट शिव के परम भक्त थे । स्कंध पुराण के प्रभास खंड में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के जीवन के बारे में विवरण मिलता है।   50 वर्ष तक राज्य करने के पश्चात वे अपने बेटे महेंद्र पाल को राज सिंहासन सौंपकर सन्यासवृति के लिए वन में चले गए थे।अरब यात्री सुलेमान ने भारत भ्रमण के दौरान लिखी पुस्तक सिलसिलीउत तुआरीख 851 ईस्वीं में  सम्राट मिहिर भोज को इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया है , साथ ही मिहिर भोज की महान सेना की तारीफ भी की है  साथ ही मिहिर भोज के राज्य की सीमाएं दक्षिण में राजकूटों के राज्य, पूर्व में बंगाल के पाल शासक और पश्चिम में मुलतान के शासकों की सीमाओं को छूती हुई बतायी है

915 ईस्वीं में भारत  आए बगदाद के इतिहासकार अल- मसूदी ने अपनी किताब मरूजुल महान मेें भी मिहिर भोज की 36 लाख सेनिको की पराक्रमी सेना के बारे में लिखा है !इनकी राजशाही का निशान “वराह” था और मुस्लिम आक्रमणकारियों के मन में इतनी भय थी कि वे वराह यानि सूअर से नफरत करते थे !

मिहिर भोज की सेना में सभी वर्ग एवं जातियों के लोगो ने राष्ट्र की रक्षा के लिए हथियार उठाये और इस्लामिक आक्रान्ताओं से लड़ाई लड़ी\samrat mihir bhoj gurjar सम्राट मिहिर भोज गुर्जर मिहिर भोज जयंती मिहिरोत्सव

सम्राट मिहिर भोज गुर्जर के मित्र काबुल का ललिया शाही राजा कश्मीर का उत्पल वंशी राजा अवन्ति वर्मन तथा नैपाल का राजा राघवदेव और आसाम के राजा थे। सम्राट मिहिर भोज के उस समय शत्रु, पालवंशी राजा देवपाल, दक्षिण का राष्ट्र कटू महाराज आमोधवर्ष और अरब के खलीफा मौतसिम वासिक, मुत्वक्कल, मुन्तशिर, मौतमिदादी थे । अरब के खलीफा ने इमरान बिन मूसा को सिन्ध के उस इलाके पर शासक नियुक्त किया था। जिस पर अरबों का अधिकार रह गया था। सम्राट मिहिर भोज ने बंगाल के राजा देवपाल के पुत्र नारायणलाल को युद्ध में परास्त करके उत्तरी बंगाल को अपने साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था। दक्षिण के राष्ट्र कूट राजा अमोधवर्ष को पराजित करके उनके क्षेत्र अपने साम्राज्य में मिला लिये थे ।सिन्ध के अरब शासक इमरान बिन मूसा को पूरी तरह पराजित करके समस्त सिन्ध गुर्जर साम्राज्य का अभिन्न अंग बना लिया था। केवल मंसूरा और मुलतान दो स्थान अरबों के पास सिन्ध में इसलिए रह गए थे कि अरबों ने गुर्जर सम्राट के तूफानी भयंकर आक्रमणों से बचने के लिए अनमहफूज नामक गुफाए बनवाई  हुई थी जिनमें छिप कर अरब अपनी जान बचाते थे ।

सम्राट मिहिर भोज गुर्जर नहीं चाहते थे  कि अरब इन दो स्थानों पर भी सुरक्षित रहें और आगे संकट का कारण बने  इसलिए उसने कई बड़े सैनिक अभियान भेज कर इमरान बिन मूसा के अनमहफूज नामक जगह को जीत कर गुर्जर साम्राज्य की पश्चिमी सीमाएं सिन्ध नदी से सैंकड़ों मील पश्चिम तक पंहुचा दी  और इसी प्रकार भारत देश को अगली शताब्दियों तक अरबों के बर्बर, धर्मान्ध तथा अत्याचारी आक्रमणों  से सुरक्षित कर दिया था। इस तरह गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के राज्य की सीमाएं काबुल से रांची व आसाम तक, हिमालय से नर्मदा नदी व आन्ध्र तक, काठियावाड़ से बंगाल तक, सुदृढ़ तथा सुरक्षित थी ।

coin by samrat mihir bhoj gurjar सम्राट मिहिर भोज गुर्जर मिहिर भोज जयंती मिहिरोत्सव सिक्के
सम्राट मिहिर भोज द्वारा चलाये गये सिक्के

अरब यात्री सुलेमान और मसूदी ने अपने यात्रा विवरण में लिखा है ’गुर्जर सम्राट जिनका नाम बराह ( मिहिर भोज )  है। उसके राज्य में चोर डाकू का भय कतई नहीं है। उसकी राजधानी कन्नौज भारत का प्रमुख नगर है जिसमें 7 किले और दस हजार मंदिर है। गुर्जर सम्राट आदि बराह का (विष्णु) का अवतार माना जाता है। यह इसलाम धर्म और अरबों का सबसे बड़ा शत्रु है। गुर्जर सम्राट मिहिर भोज अपने जीवन के पचास वर्ष युद्ध के मैदान में घोड़े की पीठ पर युद्धों में व्यस्त रहा। उसकी चार सेना थी उनमें से एक सेना कनकपाल परमार के नेतृत्व में गढ़वाल नेपाल के राघवदेव की तिब्बत के आक्रमणों से रक्षा करती थी। इसी प्रकार एक सेना अल्कान देव के नेतृत्व में पंजाब के वर्तमान गुजराज नगर के समीप नियुक्त थी जो काबुल के ललियाशाही राजाओं को तुर्किस्तान की तरफ से होने वाले आक्रमणों से रक्षा करती थी। इसकी पश्चिम की सेना मुलतान के मुसलमान शासक पर नियंत्रण करती थी। दक्षिण की सेना मानकि के राजा बल्हारा से  तथा अन्य दो सेना दो दिशाओं में युद्धरत रहती थी।सम्राट मिहिर भेाज इन चारों सेनाओं का संचालन, मार्गदर्शन तथा नियंत्रण स्वयं करता था।अपने पूर्वज गुर्जर प्रतिहार सम्राट नागभट् प्रथम  की तरह सम्राट मिहिर भोज ने अपने पूर्वजों की भांति स्थायी सेना खड़ी की जोकि  अरब आक्रान्ताओं से टक्कर लेने के लिए आवश्यक थी ! यदि नागभट् प्रथम के पश्चात के अन्य सम्राटों ने भी स्थायी, प्रशिक्षित व कुशल तथा देश भक्त सेना न रखी होती तो भारत का इतिहास कुछ और ही होता तथा भारतीय संस्कृति व सभ्यता नाम की कोई चीज बची नहीं होती ।जब अरब सेनाएं सिन्ध प्रान्त पर अधिकार करने व उसको मुसलिम राष्ट्र में परिवर्तित करने के बाद  समस्त भारत को मुसलिम राष्ट्र बनाने के लिए  सेनापति मोहम्मद जुनेद के नेतृत्व में आगे बढ़ी, तो उन्हें सिन्ध से मिले गुर्जर प्रदेश को जीतना जरुरी था। इसलिए उन्होंने भयानक आक्रमण प्रारम्भ किए।

एक तरफ अरब, सीरिया व ईराक आदि के इस्लामिक सैनिक थे, जिनका मकसद पूरी दुनिया में इस्लामी हुकूमत कायम करना था और दूसरी तरफ  महान आर्य-धर्म व संस्कृति के प्रतीक गुर्जर योद्धा !  अरबी धर्मांध योद्धा ’अल्लाह हूँ अकबर”  के उद्घोष के साथ युद्ध में आते तो मिहिर भोज की सेना जय महादेव जय गुर्जेश्वर, जय महाकाल की ललकार के साथ टक्कर लेने और काटने को तेयार थी ।

हिन्दू योद्धा रात्रि में सोये हुए सेनिको पर आक्रमण को धर्म विरुद्ध मानते थे लेकिन मुस्लिम आक्रान्ता रात्रि के समय कभी भी हमला कर देते इस प्रकार के भयानक युद्ध अरबों व गुर्जरों में निरन्तर चलते रहे । कभी रणक्षेत्र में भिनमाल, कभी हकड़ा नदी का किनारा, कभी भड़ौच व वल्लभी नगर तक अरबों के प्रहार हो जाते थे । कोई नगर क्षतिग्रस्त और कोई नगर ध्वस्त होता रहता था। जन धन की भारी हानि गुर्जरों को युद्ध में उठानी पड़ी जिनका प्रभाव अगले युद्धों पर पड़ा । बारह वर्ष तक इन भयानक युद्धों में गुर्जरों के भिनमाल आदि अनेक प्रसिद्ध नगर बुरी तरह ध्वस्त व कई राजवंश नष्ट हो गए और कई की दशा बहुत बिगड़ गई परन्तु आर्य धर्म व संस्कृति के रक्षक वीर गुर्जरों ने हिम्मत नहीं हारी ।कश्मीर का सम्राट शंकर वर्मन मिहिर भोज का मित्र था । मिहिर भोज के समय अरबों ने भारत में अपनी शक्ति बढ़ाने का खूब प्रयास किया लेकिन  बहादुर हिन्दू गुर्जर सम्राट ने अरबों को कच्छ से भी निकाल भगाया जहाँ वे आगे बढ़ने लगे थे। इस वीर सम्राट ने अपने बाहुबल से खलीफा का अधिकार सिन्ध से भी हटा लिया। मिहिर भोज का राज्याधिकारी अलाखान काबुल हिन्दूशाही वंश के राजा लालिप को अरबों के होने वाले आक्रमणों के विरूद्ध निरन्तर सहायता देता रहा क्योंकि उस समय काबुल कन्धार भारतवर्ष के ही भाग थे।

हर वर्ष आज भी इनकी याद में मिहिर भोज जयंती और मिहिरोत्सव मनाया जाता है अब राष्ट्रीय राजमार्ग 24 जो दिल्ली से लखनऊ को जोड़ता है का नाम भी दिल्ली सरकार ने गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के नाम पर रखा है और दिल्ली में निजामुद्दिन पुल है जहां से यह राजमार्ग शुरू होता है। वहां पर दिल्ली सरकार ने एक बड़ा सा पत्थर लगाया है जिस पर लिखा है गुर्जर सम्राट मिहिर भोज राष्ट्रीय राजमार्ग।  इसी राजमार्ग पर स्थित स्वामी नारायण संप्रदाय का अक्षरधाम मंदिर है। अक्षरधाम मंदिर में स्थित भारत उपवन में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान की धातू की प्रतिमा लगी है और उस पर लिखा है महाराजा गुर्जर मिहिर भोज महान।

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“The popular Indian” is a mission driven community which draws attention on the face & stories ignored by media.

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    Pushpal Roy

    (November 21, 2017 - 1:54 am)

    Emperor Mihir Bhoj’s military triumph and skill is never read out in school, college. He will be remembered to have destroyed islamic occupation army.

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