Rajesh pilot राजेश पायलट

जिन बंगलो में कभी बेचा दूध, वहीँ सांसद बनकर पहुंचे थे राजेश पायलट!

 

Rajesh pilot राजेश पायलट

सन 1979 का चुनावी दौर ! आयरन लेडी के नाम से प्रसिद्ध इंदिरा गाँधी  के सामने एक निर्भीक युवा खड़ा था , जिसकी पहचान  अभी तक सिर्फ स्क्वार्डन लीडर “राजेश्वर प्रसाद ” की थी ।इंदिरा ने राजेश्वर प्रसाद को सलाह दी कि राजनीति में कोई स्थायित्व नहीं होता इसलिए नौकरी न छोड़े क्युकि आपके बच्चे भी अभी छोटे है ।

“में श्रीमती गांधी का आशीर्वाद लेने आया हूँ सलाह नहीं ! “

– इन निर्भीक शब्दों से इंदिरा के मस्तिष्क को झकझोर देने वाले युवा थे राजेश्वर प्रसाद जो बाद में राजेश पायलट के नाम से प्रसिद्ध  हुए ।इसी स्पष्टवादिता और  निर्भीकता से इंदिरा गांधी इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने उस मिटटी से जुड़े और संघर्ष से जन्मे युवा स्क्वार्डन लीडर को टिकट देने का निर्णय कर लिया |

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इंदिरा गाँधी के साथ राजेश पायलट

10 फरवरी सन 1945 को  उत्तर प्रदेश के जिला गौतम बुध नगर ( तब जिला गाजियाबाद ) के गाँव वेदपुरा में एक गुर्जर परिवार में  जन्मे राजेश्वर प्रसाद (Rajesh Pilot)  के पिता एक सैनिक थे । 10 वर्ष की उम्र तक साधारण जीवन जीते राजेश्वर प्रसाद के परिवार पर संकट तब आया जब इनके पिता का आकस्मिक देहांत हो गया , उस वक्त इनकी उम्र 11 साल थी।   परिवार में माता , विवाह योग्य दो बहनों और एक छोटे भाई का दायित्व इनके ऊपर आ गया,  जिससे जिम्मेदारी की भावना बहुत कम उम्र  में आ गयी । उस उम्र में पैदल कई किलोमीटर नंगे पैर चलते हुए भी शिक्षा पूरी करने की लगन और कुछ करने की चाहत लिए राजेश्वर प्रसाद को कुछ सालो के बाद गाँव छोड़कर दिल्ली आने का निर्णय लेना पड़ा , जहाँ उनके  चचेरे भाई की दूध की डेरी थी ।

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युवावस्था में राजेश पायलट

ये समय राजेश्वर प्रसाद के लिए कड़ी मेहनत का था । राजेश सुबह जल्दी उठते , दूध निकालते और मंत्रियो की कोठी में दूध देने जाते फिर जल्दी आकर स्कूल भी जाते।  इसी तरह शाम को भी दूध बाटकर फिर पढने के लिए समय निकालते।  ये वो कठिन समय था जब राजेश्वर प्रसाद को संघर्ष में लैंप पोस्ट के नीचे भी पढ़ाई करनी पड़ी । लेकिन ये पीछे नहीं हटे और दोनों बहनों की शादी करने के अलावा छोटे भाई को  भी शिक्षा दिलवाई  लेकिन दुर्भाग्यवश छोटे भाई की आकस्मिक म्रत्यु ने इनको अंदर से तोड़ दिया ।

परिवार की जिम्मेदारी संभालते और दूध सप्लाई का काम करते करते ही इन्होने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और सगे भाई से ज्यादा मानने वाले इनके चचेरे भाई नत्थी सिंह ने इनको पूरा सहयोग किया और ये एयर फ़ोर्स में भर्ती हो  गये  ।वायु सेना में प्रशिक्षण के बाद वे लड़ाकू विमान के पायलट बने और फिर पंद्रह वर्षो की अथक मेहनत के बाद प्रमोशन पाकर स्क्वार्डन लीडर बने ! उन्होंने 1971 के भारत पाक युद्ध में भी भाग लिया और बहादुरी के लिए पदक भी मिलाrajesh pilot राजेश पायलट लेकिन लुटियन जोंस के बंगलो में बचपन में दूध बेचने वाले राजेश पायलट की जिन्दगी उन्हें वायु सेना से फिर वापस उन्ही बंगलो तक ले जाना चाहती थी जहां उनका कष्ट भरा समय बीता था ..शायद उन्हें अपने कहे वो शब्द चरित्रार्थ करने थे जो राजेश पायलट की पहचान बन गये थे –

“जब  किसानो और मजदूरों  के बच्चे  पढ़ लिख कर उन कुर्सियों  तक पहुचेगे जहाँ से नीतियाँ बनती और क्रियान्वित होती है तब  भारत का सही मायनों में विकास होगा “

1979 में नौकरी से इस्तीफा देकर राजेश्वर प्रसाद जब भरतपुर में कोंग्रेस का पर्चा दाखिल कर रहे थे तो वहां  के कार्यकर्ताओं ने उनसे निवेदन किया कि वे अपने नाम के साथ “पायलट ” लिखे । उन्होंने उनका आग्रह स्वीकार करके राजेश पायलट( Rajesh Pilot) के नाम से परचा भरा और जब वो बाहर निकले तो “राजेश पायलट जिंदाबाद  ” के नारे लग रहे थे ।उन्होंने भरतपुर की सीट से वहां के राजपरिवार की सदस्य महारानी को हराकर पहला चुनाव जीता और इसी के साथ राजनीति की दुनिया में उन्होंने कदम रखा ! इसके बाद उन्होंने कई चुनाव जीते और 1991 से 1993 तक टेलिकॉम मिनिस्टर रहे और 1993 से 1995 तक आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहे ।राजेश पायलट rajesh pilot इसी दौरान आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहते हुए पायलट जी ने देखा कि एक विवादस्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी जिसके सामने बड़े बड़े मंत्री और अधिकारीगण सर झुकाते थे और जिसे तत्कालीन प्रधानमन्त्री पी वी नरसिम्हा राव का करीबी भी माना जाता था उसके खिलाफ जांच बैठाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी ,उसके खिलाफ शिकायत आने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही थी , सत्ता में बेठे लोगो का भी मूक समर्थन उसे प्राप्त था , इसके अलावा सबूतों की कमी का हवाला देकर भी गिरफ्तारी न करने का दवाब भी था जिससे किसी मामले में पायलट के सामने भी संकट खड़ा हो सकता था !

पायलट ने उस वक्त कहा था कि – “चाहे मुझे जेल जाना पड़े लेकिन ये खेल ख़त्म होगा “ पायलट ने उसके खिलाफ जांच बैठाई और उसे जेल भेज दिया।  जिसका राजनितिक हलको में विरोध भी हुआ लेकिन राजेश पायलट की छवि और ज्यादा  मजबूत और कद्दावर नेता की हो गयी जिसे उसके लक्ष्य से कोई नहीं भटका सकता ।राजेश पायलट rajesh pilot ,सचिन पायलट , sachin pilot हालाकि इसका खामियाजा राजेश पायलट को मंत्रालय में फेरबदल से चुकाना पड़ा लेकिन मजबूत इरादों वाले पायलट अडिग रहे ।इन्ही मजबूत इरादों की बदोलत राजेश पायलट ने सीताराम केसरी के सामने पार्टी अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा लेकिन सफल नहीं हुए ! लेकिन  जैसा कि कहा जाता है उन्होंने अगला चुनाव सोनिया गांधी के सामने लड़ने की भी घोषणा कर दी थी । इसका उनके कई साथियो ने विरोध भी किया लेकिन वैचारिक तौर पर मजबूत और किसानो- मजदूरों द्वारा उन्हें अपना नेता माना जाता है ये विश्वास करते हुए उन्होंने पीछे हटने से मना  कर दिया।राजेश पायलट rajesh pilot ,सचिन पायलट , sachin pilot राजेश पायलट जी पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ जिसे किसी उग्रवादी संघठन द्वारा किया बताया जाता है,अपनी स्पष्टवादिता और ना झुकने वाले व्यवहार के कारण ही ये कई उग्रवादी संगठनों के निशाने  पर रहे लेकिन जनता का असीम प्यार और उनके लगाव से उनका बाल भी बांका नहीं हुआ।

“बेईमान लोग और बिचोलिये हट जाओ राजेश पायलट आ गया है “

राजेश पायलट (Rajesh Pilot) जी को ग्रामीण प्रष्ठभूमि से होने के कारण गाँवों और किसानो  से लगाव था  जिसका जिक्र वो अपने भाषणों में भी किया करते थे। चिरपरिचित राजस्थानी पगड़ी उनका पहनावा बन चुकी थी । एक बार किसी गाँव में जाने पर उन्होंने देखा कि कुछ छुटभैये नेता और अधिकारी उनके आगे पीछे लगे है और किसानो से सीधे बात नहीं करने दे रहे , तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि –

बेईमान लोग और बिचोलिये हट जाओ , राजेश पायलट आ गया है। मुझे किसी बिचोलिये की जरुरत नहीं है !

ग्रामीण भारत से उनका जुड़ाव इतना मजबूत था कि उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर कोई भी देशवासी उनसे मिल सकता था , सबकी शिकायते सुनना और बड़े आराम से सबको मनाना उनकी खासियत थी । कई बार ऐसा भी होता था कि उनसे जुड़े उनके गाँव या आस पास के लोग या जानने वाले दिल्ली में किसी मरीज को लेकर अस्पताल आने वाले लोग भी उनके घर रुकने पहुँच जाते थे जिनका वहां रुकने का भी प्रबंध पायलट करते  । उनके आवास पर ग्रामीण अंदाज में चारपाई और हुक्का उनके बुजुर्गो को अपनापन महसूस कराता जहाँ वो उनसे अपने मन की बात खुलकर कर लेते।राजेश पायलट rajesh pilot ,सचिन पायलट , sachin pilot

जय जवान जय किसान ट्रस्ट-  उन्होंने 1987 में जय जवान जय किसान ट्रस्ट बनाया जिसका उद्देश्य गरीब किसानो  और पिछडो की मदद करना था , इस ट्रस्ट के द्वारा उन्होंने गरीब बच्चो की शिक्षा , सेनिको की विधवाओं , गरीब किसानो की मदद करने एवं अपहिजो की सहायता के लिए काफी कार्य किये जोकि अनवरत जारी है । इस ट्रस्ट की सहायता से कई हॉस्पिटल और स्कूलों  को सहायता दी गयी  ।राजेश पायलट जी के परिवार में उनकी धर्मपत्नी श्रीमति  रमा पायलट ,पुत्री सारिका , पुत्र सचिन पायलट (sachin pilot) जोकि उनकी राजनीतिक विरासत को संभाल रहे है और कोंग्रेस में प्रमुख युवा चेहरों में से एक है|राजेश पायलट rajesh pilot ,सचिन पायलट , sachin pilot

वो दुखद दुर्घटना ! – पायलट जी को जीप चलाने का शौक था ,अपनी जीप वो अधिकतर खुद ही ड्राइव कर लेते थे।  11 जून 2000 को अपने चुनावी क्षेत्र दौसा से एक कार्यकर्त्ता सम्मलेन को संबोधित करके आते हुए जयपुर हाईवे पर उनकी जीप एक ट्रोले से टकरा गयी जिसमे वो गंभीर रूप से घायल हो गये और उसी दिन सवाई मानसिंह अस्पताल में शाम ७ बजे जमीन से जुडे  नेता का दुखद निधन हो गया । देश की समस्याए , किसानो की समस्याए , और गरीबो की समस्याए सदन में मजबूत तरीके  से उठाने वाली वो आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई और पीछे छोड़ गयी एक चिरपरिचित मुस्कान और कभी न भूलने वाले वो शब्द जो हमेशा प्रेरणा देंगे हर किसान और मजदूर के बच्चो को –

“जब किसानो और मजदूरों  के बच्चे पढ़ लिख कर उन कुर्सियों  तक पहुचेंगे  जहाँ से नीतियाँ बनती और क्रियान्वित होती है तब भारत का सही मायनों में विकास  होगा “- राजेश पायलट (Rajesh Pilot)

– S.K Nagar 

(यदि आपके पास भी किसी व्यक्तित्व या घटना से सम्बंधित कोई आर्टिकल या कहानी है तो हमे अवश्य भेजिए – [email protected])

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