award wapsi gang अवार्ड वापसी नसीरुद्दीन शाह

नसरूद्दीन शाह को हिन्दुस्तान में डर क्यों लगता है ?

डियर नसरूद्दीन शाह,

शायद आपने नवोदय विद्यालय का नाम सुना होगा। केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाला आवासीय विद्यालय है जोकि देश के बहुत से शहरों में है। मेरे पिता नवोदय विद्यालय में शिक्षक हैं तो मेरा पूरा जीवन नवोदय के कैम्पस में बीता है।

पापा की पोस्टिंग के चक्कर में देश के कई अच्छे-बुरे इलाके में हम रहे और फिलहाल पिछले कुछ सालों से पापा जहाँ पोस्टेड हैं, वह एक मुस्लिम बहुसंख्यक इलाका है। उस नवोदय में कम्पीट करके पहुँचने वाले करीब चालीस प्रतिशत बच्चे मुसलमान हैं।

किसी भी विद्यालय में कुछ नियम होते हैं, जैसे रविवार की छुट्टी या कैम्पस छोड़ने के लिये परमिशन। देशभर के नवोदय में भी है। पर जिस नवोदय में पिता काम कर रहे हैं, वहाँ ये नियम नाम के हैं।

नसीरुद्दीन शाह naseeruddin shah

हर शुक्रवार विद्यर्थियों की करीब चालीस प्रतिशत जनसँख्या बगल के शहर जाती है बिना किसी परमिशन के क्योंकि उन्हें वहाँ के मस्जिद में नमाज पढ़ना है। असल बात यह है कि बच्चों को इस आड़ में सप्ताह में एक दिन एक्स्ट्रा स्कूल बंक करने को भी मिल जाता है। पर आप रोक नहीं सकते क्योंकि  एक बार पहले उनसे जब कहा गया कि नमाज तो वे विद्यालय के अंदर ही पढ़ सकते है  अतः यह एक दिन का mass bunk बंद करे, तो तुरन्त विद्रोह हो गया कि ये शिक्षक हमारे धर्म पर हमला कर रहे हैं। वे उनके महत्वपूर्ण शुक्रवारी प्रार्थना को रोकना चाह रहे हैं |

मेरी बहन जब वहाँ पढ़ रही थी तो उसके कई अच्छे मुसलमान दोस्त थे। एक दिन बातों-बातों में मुद्दा उठ गया नेलपॉलिश का। उन दिनों किसी इस्लामिक देश में नेलपॉलिश लगाने पर पर लड़की की उंगली काट दी गयी थी। तुरन्त ही सारी मासूम मुस्लिम बच्चियाँ एक तरफ हो गयी इस घटना को जस्टिफाई करते हुये क्योंकि नेलपॉलिश लगाने वालीे वजू खराब कर रही थी। वह इस्लाम के विरूद्ध कार्य कर रही थी।

इस्लामिक देशो में आज भी ईशनिंदा के नाम पर अत्याचार जारी है)

मैंने अपनी बहन को डांट लगायी कि उसे जरूरत क्या है इन पचड़ो में पड़ने की? उस बच्ची ने बड़ी मासूमियत से कहा

कि दीदी पर मैं तो सही बोल रही थी, आप किसी की उंगली काटने का सोच भी कैसे सकते हैं? बहन को क्या मालूम था कि उस इलाके में इसके द्वारा कही गयी तार्किक बात भी blasphemy (ईशनिंदा ) का रंग ले सकती थी। आयशा बीबी को क्या मालूम था कि बस एक ही बर्तन से पानी पीना उसके जान पर बन आयेगा ?

मैं दिल्ली में ओखला विहार अपनी दोस्त से मिलने जाती रहती थी। एक दिन उसने बताया कि वहाँ मुसलमान इतने ज्यादा है कि उसे वहाँ के लोकल लोग मिनी पाकिस्तान बोलते हैं। सिर्फ जनसँख्या ज्यादा होने से अपने देश की पहचान मानने से इनकार करने का कोई गम नजर नहीं आ रहा था मेरी सहेली की बातों में। मानो जहाँ ज्यादा जनसँख्या हुयी वह जगह अपने-आप में एक अलग नियम कानून वाला देश हो जाता है।

तो नसरूद्दीन जी, मुझे लगता है आपका डर बिल्कुल जायज है।

मुझे भी डर लगता है अब इस देश के लिये। क्या होने वाला है यहाँ मेरे बच्चो का भविष्य? क्या मेरी छटी क्लास में पढ़ने वाली बेटी से उसकी सहेली बहस करेगी कि उंगली क्यों काटी जानी चाहिये? क्या मेरे बेटे के दोस्त जबरस्ती शुक्रवार को छुट्टी ना मिलने पर स्कूल के अंदर दंगे को तैयार रहेंगे ? क्या मेरे बच्चों को कहना पड़ेगा कि वे भारत नहीं मिनी पाकिस्तान में रह रहे हैं??

kahsmir separitist terorist अलगाववादी कश्मीर हिंदुस्तान
(अलगाववादियों के ऊपर कभी अवार्ड वापसी नहीं होती pic source – google)

जो लोग बड़े शहरों में सुरक्षित रह कर भाईचारा-भाईचारा चिल्ला रहे हैं फिलहाल उन्हें डरने की जरूरत नहीं है कुछ सालों तक। आप बाँधे रहे आँखों पर पट्टी लेकिन हम जैसों ने धरातल की सच्चाई देखी है कि जब एक धर्म विशेष बहुसंख्यक होता है तो उस क्षेत्र में बाकियों की क्या स्थिति होती है, इसीलिये अब हम डरते हैं।

इसलिए नसीरुद्दीन सर , आइये इस डर को एक साथ महसूस करते है क्योकि हम वाकई एक बुरे दौर से गुजर रहे है

(So Nasiruddin Sir, let’s be afraid together.We indeed are going towards a very dark time of this country…)

– मेघा मैत्रेय

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मेघा मैत्रेय Author

मेघा मैत्रेय हरियाणा से है और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है ! राजनीति , समाज और नारी शशक्तिकरण पर जोरदार तरीके से लिखने वाली मेघा स्टूडेंट है !

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