डोकलाम पर झुका चीन , सीमा से सेना हटाने को तैयार

72 दिनों तक लगातार चले आ रहे विवाद के बाद अंतत चीन सीमा से पीछे हटने को तैयार हो गया है | इसे रणनीतिक तौर पर भारत के लिए अहम  माना जा रहा है |

विदेश मंत्रालय की तरफ से आये बयान से संकेत मिला है कि चीन अपनी जिद भूलाकर सीमा से सेना हटाने को तैयार हो गया है | लगातार दो महीने से ज्यादा से चले आ रहे गतिरोध के बाद भारत अपना दवाब बनाने में सफल रहा है |

चीन में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री के चीन जाने और चीनी प्रधानमंत्री से मुलाकात पर भी डोकलाम विवाद की वजह से संशय बना हुआ था |

doclam issue डोकलाम विवाद

क्या है डोकलाम विवाद –

चीन सिक्किम और भूटान की सीमाएं डोकलाम पठार में मिलती है , चीन ने इसी जगह पर सड़क बनाना शुरू कर दिया था जिसका पता जून में चला |  चीन इस इलाके पर काफी समय से अपना अवैध कब्ज़ा करना चाहता है | भारत इस मामले में शुरू से ही चीन का विरोध करता आ रहा है |

चीन लगातार २ महीने से विदेश मंत्रालय और मीडिया के जरिये भारत पर दवाब बनाने की कोशिश में था जिसे उनकी सोची समझी रणनीति कहा जा रहा था | भारत इन धमकियों के बावजूद डोकलाम से सेना न हटाने के अपने रूख पर लगातार कायम रहा और चीन की तरह बडबोलापन नहीं दिखाया |भारत ने इस मामले पर संयमित रहकर ब्यान दिए |  इस वजह से भी दोनों देशो की सेनाए हटाने के निर्णय के बावजूद इस मामले में भारत का पलड़ा मजबूत रहा है |

दरसल 15 अगस्त को डोकलाम में दोनों देशो की तनातनी के बीच सेनिको के बीच पत्थरबाजी की घटना हो गयी थी जिसमे दोनों तरफ के सेनिक घायल हुए थे ! तब ये माना जा रहा था कि चीन के साथ ये विवादित मामला युद्ध का रूप ले सकता है | इस पूरे घटनाक्रम के बाद चीन को समझ आ गया होगा कि भारत अब 1962 वाला भारत नहीं है |

हालाकि इस तरह की स्थिति पहले भी कई बार बनी है जब मामला हिंसक झडपो तक पहुँच गया है |

डोकलाम विवाद भारत चीन doclam issue india china

ब्रिक्स में मोदी के दौरे से पहले कूटनीतिक जीत

सितम्बर में होने जा रही ब्रिक्स समिट से पहले इस तरह डोकलाम विवाद का ख़त्म होना ना सिर्फ मोदी सरकार बल्कि भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है | ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री मोदी चीनी प्रधानमंत्री से भी मुलाकात कर सकते है | जहा लगातार 72 दिनों से चीनी मीडिया और विदेश मंत्रालय लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहा था और लगातार उकसावे की कार्यवाही चीन की तरफ से की जा रही थी वहीँ भारत की तरफ से संयमित भाषा में जवाब देकर इस धारणा को और भी मजबूत किया गया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है लेकिन अपनी सुरक्षा और जमीन के लिए हम पीछे नहीं हटने वाले |

 

 

Comments

comments

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *